खुद से जीतने की जिद है मुझे खुद को ही हराना है,
मै भीड़ नहीं हूँ दुनिया की मेरे अन्दर एक ज़माना है.!!
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खुद भी रोता है, मुझे भी रुला के जाता है…
ये बारिश का मौसम, उसकी याद दिला के जाता हैं।
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ऐसा नहीं है की तेरे जाने से मर जाएंगे हम।
फिकर है तो
बस इन जख्मों के साथ कैसे आगे चल पायेंगे हम।
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आदत सी हो चली है, तेरी बेरुखी की अब तो;
तू खुद मुझे बुलाये तो भी यकीन नहीं होता।
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कितना ही हो तेरी बेरुखी का ख्याल।
तेरी मुस्कान के आगे बाकि कुछ कीमती नहीं।
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Wednesday, December 20, 2017
खुद से जीतने की जिद है
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